पर एक पल की प्रीत ना पाते
कुछ तो होता पास अपने, जो कभी लुटा ना पाते, कोई तो याद चुभती इतनी , कि कभी भुला ना पाते, कोई तो बात इतनी कड़वी होती, कि किसी को सुना ना पाते, कोई तो होता खुश इस कदर, कि हम भी उसे रुला ना पाते. ख़ुशियों की होती इतनी कीमत, कि किसी को चुका ना पाते, कोई तो रात होती इतनी अभागी, कि किसी को सुला ना पाते, आसूं बहते रोज़ यूं ही, मगर इन आखोँ को सुजा ना पाते, कोई तो आग जलती सीने मे, जिसे चाहकर भी बुझा ना पाते. कोई तो सबक होता ऐसा, जिसे किसी को सिखा ना पाते, कोई तो ज़ख्म होता इतना गहरा, कि कभी तुम्हें दिखा ना पाते, कभी तो मरता वक़्त युं भी, कि तकदीर से भी ज़िला ना पाते, कोई तो बिछुड़ता इस कदर, कि उमर भर फ़िर मिला ना पाते. कोई ज़ुर्म किया होता ऐसा, कि उसकी हम सज़ा ना पाते, पाते दुश्मनी हर जगह, पर दोस्त से कभी दगा ना पाते, कोई तो दर्द होता किसी कोने में, कि कभी बता ना पाते, कोई तो खुशी बन जाती इतनी बडी, कि आखोँ से भी जता ना पाते. ख़ुशी छायी होती हर चेहरे पर, और कहीं कलह ना पाते, किसी के दिल में रह पाते, फ़िर चाहे स्वर्ग में जगह ना पाते, जानते काश अपने दिल के सारे राज़, चाहे खुद...