मेरी दैनंदिनी -८
२० मई २००५ वक़्त बदलता है , तो हालात भी बदल जाते हैं। और बदलते हालातों में आख़िर इन्सान भी बदलने लगते हैं। पर दुनिया की इन तमाम बदलती चीजों में जो चीज नहीं बदलनी चाहिए , वो ना प्यार है न भरोसा और ना ही उम्मीदें , वो एक चीज सिर्फ और सिर्फ दोस्ती होनी चाहिऐ॥ सच में दोस्ती हर चीज, हर आशंका, हर संभावना, हर इरादों से परे होनी चाहिऐ। राज की बातें पता नहीं क्यों मुझे कुछ अजीब सा अहसास दिलाती हैं, पर राज , सच कहूँ अगर तुम्हें लगता है की मैंने तुम्हारे लिए या फिर तुमने मेरे लिए कुछ किया है तो तुम्हे गलत लगता है दोस्त । खैर तुम्हें क्या कहूँ मैं खुद दोस्ती की इन्हीं उलझनों में उलझा हूँ , मुझे खुद लगता है की मैंने काफी किया है अंकित के लिए और उससे ज्यादा शायद अंकुर ने मेरे लिए किया हो॥ पर वक़्त का फेर देखो और मेरी जगह खड़े होकर देखो , क्या अंकुर क्या अंकित और क्या मैं... हर कोई एक दूसरे के लिए मतलब खो चुका है दोस्ती तो ईश्वर ही जाने कहाँ रह गयी। खैर कुछ अच्छी बातों में शायद ये है कि हम में से किसी ने शायद किसी को कुछ नहीं जताया । मेरी खुदगर्जी कह लो या फिर मेरी अहसानफरामोशी , आज तक शायद मेरी दोस्त...