नफरत है मुझे
नफरत है मुझे, ज़िन्दगी के उन अहसासों से.
जो पल पल मुझे यकीन दिलाते हैं, कि मैं हर कदम एक झूठ के साये में चल रहा हूँ.
ये जीवन एक मिथ्या के अलावा अगर कुछ है,तो मैं उस पहलु को छूना चाहता हूँ. और शायद इसीलिये मैं कब से भटक रहा हूँ काल के चक्रव्युह में.
मुझे खुद नहीं पता कि इस सफर की मंजिल कहाँ है. क्या पता मेरा ये सफर एक अच्छे मुकाम पे पहुँच सके.
क्या पता मेरी आखिरी साँस एक सच के साये में आकार ले पाये, शायाद सबसे विशाल सत्य आखिरी सत्य हो ;
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