मेरी दैनन्दिनी 3
२२ फरवरी २००५
एक और रात ... जो कुछ अधूरी सी लग रही है, जहँ वास्तव में कुछ सोचने की जरूरत पड़ रही है.. सोचता हूँ जब सब कुछ दाँव पर लगा दिया था, तब तो सब मूक बने देखते रहे ..फ़िर आज क्यों वही सब लोग पूछने लगे हैं " उस वक्त तुम्हें मुझसे मदद मांगनी चाहिये थी.. शायद मैं तुम्हरी मदद कर सकता था."
यूं तो इस सवाल के कई निहितार्थ हो जाते हैं, पर ये उन लोगों की दोस्ती के वो अधूरे ज़ज़्बात हैं जिनके छलकने की जरूरत कभी थी ही नहीं .. आज भी नहीं...
खैर आज मुझे एक बात पता है.. जिन्दगी सन्तुलन की अवस्था में है, जहाँ कोई आना चाहे तो संयोजित हो जायेगा और कोई जाना भी चाहे तो सहर्ष जा सकता है..
ऐ मेरे दोस्तों सच ये है कि..
ये मेरे ख्वाबों की दुनिया ना ही सही लेकिन,
अब आ गया तो दो दिन कयाम करता चलूँ ..
एक और रात ... जो कुछ अधूरी सी लग रही है, जहँ वास्तव में कुछ सोचने की जरूरत पड़ रही है.. सोचता हूँ जब सब कुछ दाँव पर लगा दिया था, तब तो सब मूक बने देखते रहे ..फ़िर आज क्यों वही सब लोग पूछने लगे हैं " उस वक्त तुम्हें मुझसे मदद मांगनी चाहिये थी.. शायद मैं तुम्हरी मदद कर सकता था."
यूं तो इस सवाल के कई निहितार्थ हो जाते हैं, पर ये उन लोगों की दोस्ती के वो अधूरे ज़ज़्बात हैं जिनके छलकने की जरूरत कभी थी ही नहीं .. आज भी नहीं...
खैर आज मुझे एक बात पता है.. जिन्दगी सन्तुलन की अवस्था में है, जहाँ कोई आना चाहे तो संयोजित हो जायेगा और कोई जाना भी चाहे तो सहर्ष जा सकता है..
ऐ मेरे दोस्तों सच ये है कि..
ये मेरे ख्वाबों की दुनिया ना ही सही लेकिन,
अब आ गया तो दो दिन कयाम करता चलूँ ..
Comments
undre relationship.
!!hahaha!!
ap