मेरी दैनंदिनी - ६
२० अप्रैल २००५
farewell हो चुकी है, सिर्फ दो या तीन कदम और चलना है और पीछे मुड़ने के सारे रास्ते बंद हो जायेंगे सच कहूँ तो यहाँ आकर महसूस होता है कि कुछ भी हुआ होता पिछले चार सालों में ... आज यहाँ आकर हर बात हमे संतुष्टि ही देती ॥ आज सच में ख़ुशी इस बात की है कि मैंने अपने अंतर में कुछ खोया नहीं , या यूं कह लो कि अपने हाथों से कभी कुछ लुटाया नहीं । पर हाँ, इतना जरूर है कि जो चाहा कभी वो पाया नहीं, और जो मेरे हिस्से में आया वो कभी चाहा ही नहीं था ।
लोग पहले प्यार और दूसरे प्यार के बीच हमेशा एक बहस में उलझे रहते हैं , शायद पिछले कुछ समय से मैं भी उसी बहस में अपने आप को उलझा हुआ महसूस कर रहा हूँ । पहला प्यार या दूसरा प्यार , या फिर चाहे अन्तिम प्यार... मेरे लिए हर बार प्यार में पागलपन के अतिरिक्त अगर कुछ एक बात हमेशा समान रही है तो वो है हर बार प्यार का अधूरा रह जाना ॥
हर बार मेरे प्रेम को अधूरेपन की विमायें छूने पे जाने क्यों इतना मजबूर होना पड़ा।
हर अधूरेपन की मदहोशी को मैंने जीते जागते महसूस किया है और हर बार मैं खुद से सिर्फ एक ही सवाल करता रह गया...
" आख़िर मेरा हर प्यार इतना बदकिस्मत क्यों था ??"
farewell हो चुकी है, सिर्फ दो या तीन कदम और चलना है और पीछे मुड़ने के सारे रास्ते बंद हो जायेंगे सच कहूँ तो यहाँ आकर महसूस होता है कि कुछ भी हुआ होता पिछले चार सालों में ... आज यहाँ आकर हर बात हमे संतुष्टि ही देती ॥ आज सच में ख़ुशी इस बात की है कि मैंने अपने अंतर में कुछ खोया नहीं , या यूं कह लो कि अपने हाथों से कभी कुछ लुटाया नहीं । पर हाँ, इतना जरूर है कि जो चाहा कभी वो पाया नहीं, और जो मेरे हिस्से में आया वो कभी चाहा ही नहीं था ।
लोग पहले प्यार और दूसरे प्यार के बीच हमेशा एक बहस में उलझे रहते हैं , शायद पिछले कुछ समय से मैं भी उसी बहस में अपने आप को उलझा हुआ महसूस कर रहा हूँ । पहला प्यार या दूसरा प्यार , या फिर चाहे अन्तिम प्यार... मेरे लिए हर बार प्यार में पागलपन के अतिरिक्त अगर कुछ एक बात हमेशा समान रही है तो वो है हर बार प्यार का अधूरा रह जाना ॥
हर बार मेरे प्रेम को अधूरेपन की विमायें छूने पे जाने क्यों इतना मजबूर होना पड़ा।
हर अधूरेपन की मदहोशी को मैंने जीते जागते महसूस किया है और हर बार मैं खुद से सिर्फ एक ही सवाल करता रह गया...
" आख़िर मेरा हर प्यार इतना बदकिस्मत क्यों था ??"
Comments
beautiful lines..hiding much more within,than revealing.hv been thinking to write smthing relating to this for long,lets see.
Thank you so much for reading and commenting upon...
और एक बात के लिये मैं निश्चिंत हूँ कि वर्तमान बहुत सुन्दर है और भविष्य इस से भी सुन्दर होगा ! मैं तो बस इस डायरी का आखिरी पन्ना पढना चाहता हूँ !
दर्शन