मेरी दैनंदिनी - १२

१५ जून २००५

१८ को मैं दिल्ली जा रहा हूँ , और २७ को पुणे । देखें क्या होता है ? आज वर्षा वशिष्ठ की तरह एक सवाल मेरे मन में कौंध रहा है बार बार - "मेरा क्या बनेगा ?"
पिछले कुछ दिनों से इन्टरनेट की आदत सी हो गयी है , ऐसा लग रहा है आने वाला वक्त किसी भी वक्त दस्तक दे सकता है। कह लो या तो वक्त आवश्यकता अनुसार बदल रहा है या फ़िर हो सकता है मेरा अनुमान हो ये सिर्फ़।
कल रोशनी का एक ऑफलाइन मैसेज आया था॥
"All the Best for this new life.. your all life will depends on your next two -three months . so do your best. Good luck "
इस मैसेज को देखकर एक अजीब सी खुशी हुयी , जाने किस बात की , पर लगा कुछ पाया है आज जीवन में।
वैसे भी सोचा जाए तो जीवन में सभी कुछ सम्भव है, कभी कभी शायद संभावनाओं से भी ज्यादा ।
कल शाम तक ११ लोग कॉलेज ग्रुप के सदस्य बन चुके थे।
इस ग्रुप की सफलता पे मुझे शक नहीं है पर आश्चर्य जरूर हुआ की ऐसा कैसे॥
As an owner I was the first member, but really surprised to see the names of next few members...
शायद यही जिन्दगी के वो कोने हैं जो कभी केन्द्र नहीं बन पाएंगे ॥

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