तुम भाग-२
रोशन कर दे ज़र्रा ज़र्रा , पूनम की रात हो तुम,
मेरे लिये वजह तो कभी कुछ थी ही नहीं मगर,
जीता हूँ जिस जिसके लिये , वो हर बात हो तुम।
खुशनुमा सुबह हो, या उससे पहले की सहर हो तुम,
वक़्त हो पल भर का,या जीवन का हर प्रहर हो तुम,
चाँद को कह तो दूँ , प्रतिमान सुन्दरता का मगर,
चाँदनी की किस्मत पर , रूप का कहर हो तुम।
सिर्फ एक मौसम हो , या पूरी बहार हो तुम,
पहली खामोशी हो , या आखिरी पुकार हो तुम,
लड़ने की आरज़ू हो, या मरने की हसरत हो,
जीत हो किसी की ,या किसी की हार हो तुम।
अहसास तुमको ना सही , किसी का अहसास हो तुम,
दुनिया बदल दे जो, दिल की वो आवाज़ हो तुम,
खुद की अहमियत से हो अन्जान, पर अब तो जान लो,
कि सुरों की थिरकन हो , जीवन का साज हो तुम।
क्षितिज हो किसी का, किसी का फलक हो,
हंसने की वज़ह हो, खुशियों की झलक हो,
अपने वज़ूद को समझने की कोशिश तो करो,
लड़ने का इरादा हो तुम, जीत की ललक हो.
Comments
turant hi ek ajeeb si lalak jagi aapse rubaru hone ki. bahut hi umda prayas tha. ummeed hai aap bhavishya mein aise hi madhur vichar duniya ko pradaan karenge.
badhayio sahit,
Pratyush Garg
PS: naacheez bhi kabhi kabhi kalam ghaseet leta hai. fursat mile to padhariyega. blog address hai:
www.kavyaagni.blogspot.com
turant hi ek ajeeb si lalak jagi aapse rubaru hone ki. bahut hi umda prayas tha. ummeed hai aap bhavishya mein aise hi madhur vichar duniya ko pradaan karenge.
badhayio sahit,
Pratyush Garg
PS: naacheez bhi kabhi kabhi kalam ghaseet leta hai. fursat mile to padhariyega. blog address hai:
www.kavyaagni.blogspot.com